बुधवार, 9 जून 2021

सुसंगत से प्राप्त सद्गति

#सुसंगत से  प्राप्त सद्गति

एक भँवरे की मित्रता एक गोबरी ( गोबर में रहने वाले ) कीड़े से थी, एक दिन कीड़े ने भँवरे से कहा- भाई तुम मेरे सबसे प्रिय मित्र हो इसलिए तुम आज मेरे पास भोजन के लिए आओ

भंवरा भोजन खाने पहुँचा !  खाने के बाद भंवरा सोच में पड़ गया- कि मैंने बुरे का संग किया इसलिए आज मुझे गोबर खाना पड़ा । अब भँवरे ने कीड़े को अपने यहां आने का निमंत्रण दिया कि तुम कल मेरे यहाँ खाने पर आओ

अगले दिन कीड़ा भंवरे के यहाँ पहुँचा ! भंवरे ने कीड़े को उठा कर गुलाब के फूल पर बिठा दिया ! कीड़े ने परागरस पिया ! मित्र का धन्यवाद कर ही रहा था कि पास के मंदिर का पुजारी आया और फूल तोड़ कर मंदिर ले गया तथा बिहारी जी के चरणों में चढ़ा दिया ! कीड़े को ठाकुर जी के दर्शन हुए , चरणों में बैठने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ ! 
संध्या काल में पुजारी ने सारे फूल इकट्ठे किए और गंगा जी में छोड़ आए ! कीड़ा अपने भाग्य पर हैरान था ! इतने मे भंवरा उड़ता हुआ कीड़े के पास आया, पूछा- मित्र ! क्या हाल है ? 
कीड़े ने कहा- भाई ! जन्म जन्म के पापों से मुक्ति हो गयी ! ये सब अच्छी संगत का फल है 
*संगत से गुण उपजे, संगत से गुण जाए*
*लोहा लगा जहाज़ में, पानी में उतराय*
कोई भी नहीं जानता कि.. हम इस जीवन के सफर में एक दूसरे से क्यों मिलते हैं 
सब के साथ रक्त संबंध नहीं हो सकते परन्तु परमात्मा हमें कुछ लोगों के साथ मिलाकर अद्भुत रिश्तों में बांध देता है 
*हमें उन रिश्तों को हमेशा संजो कर रखना चाहिए*

*जय श्री कृष्णा* 🙏🏻

Bandana

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